क्योंकि पियक्कड़ और खाउ अपना भाग खोते हैं, और पीनकवाले को चिथड़े
पहिनने पड़ते हैं।
कौन कहता है, हाय? कौन कहता है, हाय हाय? कौन झगड़े रगड़े में फंसता है? कौन बक बक करता है? किसके अकारण घाव होते हैं? किसकी आंखें लाल हो जाती हैं?
उनकी जो दाखमधु देर तक पीते हैं, और जो मसाला मिला हुआ दाखमधु ढूंढ़ने को जाते हैं।
जब दाखमधु लाल दिखाई देता है, और कटोरे में उसका सुन्दर रंग होता है, और जब वह धार के साथ उंडेला जाता है, तब उसको न देखना।
क्योंकि अन्त में वह सर्प की नाई डसता है, और करैत के समान काटता है।
तू विचित्रा वस्तुएं देखेगा, और उल्टी-सीधी बातें बकता रहेगा।
और तू समुद्र के बीच लेटनेवाले वा मस्तूल के सिरे पर सोनेवाले के समान रहेगा।
तू कहेगा कि मैं ने मार तो खाई, परन्तु दुःखित न हुआ; मैं पिट तो गया, परन्तु मुझे कुछ सुधि न थी। मैं होश में कब आउं? मैं तो फिर मदिरा ढूंढूंगा।।
पहिनने पड़ते हैं।
कौन कहता है, हाय? कौन कहता है, हाय हाय? कौन झगड़े रगड़े में फंसता है? कौन बक बक करता है? किसके अकारण घाव होते हैं? किसकी आंखें लाल हो जाती हैं?
उनकी जो दाखमधु देर तक पीते हैं, और जो मसाला मिला हुआ दाखमधु ढूंढ़ने को जाते हैं।
जब दाखमधु लाल दिखाई देता है, और कटोरे में उसका सुन्दर रंग होता है, और जब वह धार के साथ उंडेला जाता है, तब उसको न देखना।
क्योंकि अन्त में वह सर्प की नाई डसता है, और करैत के समान काटता है।
तू विचित्रा वस्तुएं देखेगा, और उल्टी-सीधी बातें बकता रहेगा।
और तू समुद्र के बीच लेटनेवाले वा मस्तूल के सिरे पर सोनेवाले के समान रहेगा।
तू कहेगा कि मैं ने मार तो खाई, परन्तु दुःखित न हुआ; मैं पिट तो गया, परन्तु मुझे कुछ सुधि न थी। मैं होश में कब आउं? मैं तो फिर मदिरा ढूंढूंगा।।