Saturday, August 14, 2010

JESUS SAID

                   यीशू ने कहा

और वह अपना मुंह खोलकर उन्हें यह उपदेश देने लगा


धन्य हैं वे जो मन के दीन हैं क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है।


धन्य हैं वे जो शोक करते हैं क्योंकि वे शांति पाएंगे।


धन्य हैं वे जो नम्र हैं क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे।


धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे है् क्यो्कि वे तृप्त किये जायेगें।


धन्य हैं वे जो दयावन्त हैं क्योंकि उन पर दया की जाएगी।


धन्य हैं वे जिन के मन शुद्ध हैं क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे।


धन्य हैं वे जो मेल करवानेवाले हैं क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे।


धन्य हैं वे जो धर्म के कारण सताए जाते हैं क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है।


धन्य हो तुम जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें और सताऐं और झूठ बोल बोलकर तुम्हारे विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें।


आनन्दित और मगन होना क्योंकि तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्हों ने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था।।


तुम पृथ्वी के नमक हो परन्तु यदि नमक का स्वाद बिगड़ जाए तो वह फिर किस वस्तु से नमकीन किया जाएगा फिर वह किसी काम का नहीं केवल इस के कि बाहर फेंका जाए और मनुष्यों के पैरों तले रौंदा जाए।


तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता।


और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है।


उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की जो स्वर्ग में हैं बड़ाई करें।।


यह न समझो कि मैं व्यवस्था या भविष्यद्वक्ताओं की पुस्तकों को लोप करने आया हूं।लोप करने नहीं परन्तु पूरा करने आया हूं क्योंकि मैं तुम से सच कहता हूं कि जब तक आकाश और पृथ्वी टल न जाएं तब तक व्यवस्था से एक मात्रा या बिन्दु भी बिना पूरा हुए नहीं टलेगा।


इसलिये जो कोई इन छोटी से छोटी आज्ञाओं में से किसी एक को तोड़े और वैसा ही लोगों को सिखाए वह स्वर्ग के राज्य में सब से छोटा कहलाएगा परन्तु जो कोई उन का पालन करेगा और उन्हें सिखाएगा वही स्वर्ग के राज्य में महान कहलाएगा।


क्योंकि मैं तुम से कहता हूं, कि यदि तुम्हारी धार्मिकता शास्त्रियों और फरीसियों की धार्मिकता से ब-सजय़ बढ़ कर न हो तो तुम स्वर्ग के राज्य में कभी प्रवेश करने न पाओगे।।


तुम सुन चुके हो कि पूर्वकाल के लोगों से कहा गया था कि हत्या न करना और जो कोई हत्या करेगा वह कचहरी में दंड के योग्य होगा।



परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं कि जो कोई अपने भाई पर क्रोध करेगा वह कचहरी में दण्ड के योग्य होगाः और जो कोई अपने भाई को निकम्मा कहेगा वह महासभा में दंड के योग्य होगा और जो कोई कहे अरे मूर्ख वह नरक की आग के दण्ड के योग्य होगा।


इसलिये यदि तू अपनी भेंट वेदी पर लाए और वहां तू स्मरण करे कि मेरे भाई के मन में मेरी ओर से कुछ विरोध है तो अपनी भेंट वहीं वेदी के साम्हने छोड़ दे।और जाकर पहिले अपने भाई से मेल मिलाप कर तब आकर अपनी भेंट चढ़ा।


जब तक तू अपने मुद्दई के साथ मार्ग में हैं उस से झटपट मेल मिलाप कर ले कहीं ऐसा न हो कि मुद्दई तुझे हाकिम को सौंपे और हाकिम
तुझे सिपाही को सौंप दे और तू बन्दीगृह में डाल दिया जाए। मैं तुम से सच कहता हूं कि जब तक तू कौड़ी कौड़ी भर न दे तब तक वहां से छूटने न पाएगा।।


तुम सुन चुके हो कि कहा गया था, कि व्यभिचार न करना।

परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं कि जो कोई किसी स्त्री पर कुदृष्टि डाले वह अपने मन में उस से व्यभिचार कर चुका।

यह भी कहा गया था कि जो कोई अपनी पत्नी को त्याग दे तो उसे त्यागपत्र दे।

परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं कि जो कोई अपनी पत्नी को व्यभिचार के सिवा किसी और कारण से छोड़ दे तो वह उस से व्यभिचार करवाता है और जो कोई उस त्यागी हुई से ब्याह करे वह व्यभिचार करता है।।


फिर तुम सुन चुके हो कि पूर्वकाल के लोगों से कहा गया था कि झूठी शपथ न खाना परन्तु प्रभु के लिये अपनी शपथ को पूरी करना।

परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं कि कभी शपथ न खाना न तो स्वर्ग की क्योंकि वह परमेश्वर का सिंहासन है।

न धरती की क्योंकि वह उसके पांवों की चौकी है न यरूशलेम की क्योंकि वह महाराजा का नगर है।

अपने सिर की भी शपथ न खाना क्योंकि तू एक बाल को भी न उजला न काला कर सकता है।

परन्तु तुम्हारी बात हां की हां या नहीं की नहीं हो क्योंकि जो कुछ इस से अधिक होता है वह बुराई से होता है।।


तुम सुन चुके हो कि कहा गया था कि आंख के बदले आंख, और दांत के बदले दांत।


परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं कि बुरे का सामना न करना परन्तु जो कोई तेरे दहिने गाल पर थप्पड़ मारे उस की ओर दूसरा भी फेर दे।


और यदि कोई
तुझ पर नालिश करके तेरा कुरता लेना चाहे तो उसे दोहर भी ले लेने दे।


और जो कोई तुझे कोस भर बेगार में ले जाए तो उसके साथ दो कोस चला जा।


जो कोई तुझसे से मांगे उसे दे और जो तुझसे से उधार लेना चाहे उस से मुंह न मोड़।।


तुम सुन चुके हो कि कहा गया था; कि अपने पड़ोसी से प्रेम रखना और अपने बैरी से बैर।


परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सतानेवालों के लिये प्रार्थना करो।


जिस से तुम अपने स्वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनो पर अपना सूर्य उदय करता है और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है।


क्योंकि यदि तुम अपने प्रेम रखनेवालों ही से प्रेम रखो तो तुम्हारे लिये क्या लाभ होगा क्या महसूल लेनेवाले भी ऐसा ही नहीं करते


और यदि तुम केवल अपने भाइयों ही को नमस्कार करो तो कौन सा बड़ा काम करते हो क्या अन्यजाति भी ऐसा नहीं करते


इसलिये चाहिये कि तुम सिद्ध बनो जैसा तुम्हारा स्वर्गीय पिता सिद्ध है।।
   

          

the kingdom of heaven

                                   The Kingdom Of Heaven 

उस ने उन्हें एक और दृष्टान्त दिया कि

स्वर्ग का राज्य उस मनुष्य के समान है जिस ने अपने खेत में अच्छा बीज बोया।पर जब लोग सो रहे थे तो उसका बैरी आकर गेहूं के बीच जंगली बीज बोकर चला गया।जब अंकुर निकले और बालें लगी तो जंगली दाने भी दिखाई दिए।इस पर गृहस्थ के दासों ने आकर उस से कहा हे स्वामी क्या तू ने अपने खेत में अच्छा बीज न बोया था फिर जंगली दाने के पौधे उस में कहां से आए उस ने उन से कहा यह किसी बैरी का काम है। दासों ने उस से कहा क्या तेरी इच्छा है कि हम जाकर उन को बटोर लें उस ने कहा ऐसा नहीं न हो कि जंगती दाने के पौधे बटोरते हुए उन के साथ गेहूं भी उखाड़ लो।कटनी तक दोनों को एक साथ ब-सजय़ने दो और कटनी के समय मैं काटनेवालों से कहूंगा पहिले जंगली दाने के पौधे बटोरकर जलाने के लिये उन के गठ्ठे बान्ध लो और गेहूं को मेरे खत्ते में इकठ्ठा करो।।

उस ने उन्हें एक और दृष्टान्त दिया कि स्वर्ग का राज्य राई के एक दाने के समान है जिसे किसी मनुष्य ने लेकर अपने खेत में बो दिया।वह सब बीजों से छोटा तो है पर जब ब-सजय़ जाता है तब सब साग पात से बड़ा होता है और ऐसा पेड़ हो जाता है कि आकाश के पक्षी आकर उस की डालियों पर बसेरा करते हैं।।

उस ने एक और दृष्टान्त उन्हें सुनाया कि स्वर्ग का राज्य खमीर के समान है जिस को किसी स्त्री ने लेकर तीन पसेरी आटे में मिला दिया और होते होते वह सब खमीर हो गया।।ये सब बातें यीशु ने दृष्टान्तों में लोगों से कहीं और बिना दृष्टान्त वह उन से कुछ न कहता था।कि जो वचन भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था वह पूरा हो कि मैं दृष्टान्त कहने को अपना मुंह खोलूंगाः मैं उन बातों को जो जगत की उत्पत्ति से गुप्त रही हैं प्रगट करूंगा।।तब वह भीड़ को छोड़कर घर में आया और उसके चेलों ने उसके पास आकर कहा खेत के जंगली दाने का दृष्टान्त हमें सम-हजया दे।उस ने उन को उत्तर दिया कि अच्छे बीज का बोनेवाला मनुष्य का पुत्र है।खेत संसार है अच्छा बीज राज्य के सन्तान और जंगली बीज दुष्ट के सन्तान हैं।जिस बैरी ने उन को बोया वह शैतान है कटनी जगत का अन्त हैः और काटनेवाले स्वर्गदूत हैं।सो जैसे जंगली दाने बटोरे जाते और जलाए जाते हैं वैसा ही जगत के अन्त में होगा।मनुष्य का पुत्रा अपने स्वर्गदूतों को भेजेगा और वे उसके राज्य में से सब ठोकर के कारणों को और कुकर्म करनेवालों को इकठ्ठा करेंगे।और उन्हें आग के कुंड में डालेंगे वहां रोना और दांत पीसना होगा।उस समय धर्मी अपने पिता के राज्य में सूर्य की नाई चमकेंगे जिस के कान हों वह सुन ले।।

स्वर्ग का राज्य खेत में छिपे हुए धन के समान है जिसे किसी मनुष्य ने पाकर छिपा दिया और मारे आनन्द के जाकर और अपना सब कुछ बेचकर उस खेत को मोल लिया।।


फिर स्वर्ग का राज्य एक व्योपारी के समान है जो अच्छे मोतियों की खोज में था।जब उसे एक बहुमूल्य मोती मिला तो उस ने जाकर अपना सब कुछ बेच डाला और उसे मोल ले लिया।।

फिर स्वर्ग का राज्य उस बड़े जाल के समान है जो समुद्र में डाला गया और हर प्रकार की मछलियों को समेट लाया।

और जब भर गया तो उस को किनारे पर खींच लाए और बैठकर अच्छी अच्छी तो बरतनों में इकठ्ठा किया और निकम्मी निकम्मीं फेंक दी।जगत के अन्त में ऐसा ही होगाः स्वर्गदूत आकर दुष्टों को धर्मियों से अलग करेंगे और उन्हें आग के कुंड में डालेंगे।

वहां रोना और दांत पीसना होगा। 

JESUS SAID

Matthew 12:35to37
भला मनुष्य मन के भले भंडार से भली बातें निकालता है और बुरा मनुष्य बुरे भंडार से बुरी बातें निकालता है।

और मै तुम से कहता हूं कि जो जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे न्याय के दिन हर एक बात का लेखा देंगे।

क्योंकि तू अपनी बातों के कारण निर्दोष और अपनी बातों ही के कारण दोषी ठहराया जाएगा।।

And he said, That which cometh out of the man, that defileth the man.

यदि किसी के सुनने के कान हों तो सुन ले। जब वह भीड़ के पास से घर में गया, तो उसके चेलों ने इस दृष्टान्त के विषय में उस से पूछा। उस ने उन से कहा; क्या तुम भी ऐसे ना समझ हो? क्या तुम नहीं समझते, कि जो वस्तु बाहर से मनुष्य के भीतर जाती है, वह उसे अशुद्ध नहीं कर सकती? क्योंकि वह उसके मन में नहीं, परन्तु पेट में जाती है, और संडास में निकल जाती है? यह कहकर उस ने सब भोजन वस्तुओं को शुद्ध ठहराया। फिर उस ने कहा; जो मनुष्य में से निकलता है, वही मनुष्य को अशुद्ध करता है।  क्योेंकि भीतर से अर्थात् मनुष्य के मन से, बुरी बुरी चिन्ता व्यभिचार। चोरी, हत्या, परस्त्राीगमन, लोभ, दुष्टता, छल, लुचपन, कुदृष्टि, निन्दा, अभिमान, और मूर्खता निकलती हैं। ये सब बुरी बातें भीतर ही से निकलती हैं और मनुष्य को अशुद्ध करती हैं।। यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? 
 Mark 7:16to23

I came not to call the righteous, but sinners to repentance.

Mark 2:13to17  
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Sunday, August 8, 2010

Proverbs

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